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Ishwar Jha

Entrepreneur, Digital Media Specialist, Technology Innovator, Speaker & Blogger. I relish the vision of creating a collaborative and participatory platform that would help enrich the lives of people. My expertise includes; - Business model generation - Lean Startup - Customer Development - Digital Strategy - Technical Innovations - Digital Product design and development - Mentoring, coaching and inflection support for entrepreneurs

May the force be with you

There are times when you feel like you are all alone in this world, there is a question spinning in your head that why are you pitted against the world.

Faced with such difficulties, obstacles and roadblocks the wise discovers the truth. They know that the universe is supporting them in their endeavors.

They look for orchestrating the universal energy to lift them up, to make their burdens lighter, they tap into their wisdom and the strength of the universe to sail through these testing times.

Such orchestration of spiritual and universal energies signified as self-control, self-determination, and self-esteem.

When it all boils down to it, our motivation to persevere must be intrinsic. It can’t come from anything outside of us; it must come from within.

When we make this happen, we recognize it as our strengths, and we recognize it as our potential.

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6 Truths about finding your passion

1. You will need to experiment with lots of things before you know your passion

2. You have to give time to discover your true passion.

3. Never confuse your interests with the passion – interests are momentary flirting with something that excites you.

4. Your true passion will constantly look attractive to you and you will keep going back to it.

5. Your passion will rule over your thinking and day dreaming

6. More you invest your time, money and resources into it, more the meaningfulness you will experience

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Surrender your abilities in capable hands

Surrender your abilities in capable hands to realize your true potential
Lord Hanuman possess indomitable strength, power, wisdom, ability, and capability. He surrendered all at the feet of Lord Ram. Lord Hanuman never used it for himself, never go berserk, never boasted of his talent to promote himself.
He surrendered everything to Lord Ram and he was blessed with the boon of having eight Siddhis and Nine Nidhis. Shri Ram Jai Ram Jai Jai Ram..

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गुणों और कर्मो के हिसाब से ही वर्णों का विभाजन

श्रीकृष्ण कहते हैं: “गुणों और कर्मों के हिसाब से मैंने ही चार वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र की रचना की है। पर मुझे कर्म लिप्त नहीं करते क्योंकि कर्म फल की चिंता नहीं करता।

यहाँ कहीं भी यह नहीं कहा गया है की क्योंकि तुम एक ख़ास वर्ण में पैदा हो गए इसलिए तुम बड़े हो गए या तुझे इसका घमंड करना चाहिए। आज की करियर सफलता की जितनी भी विधाएँ हैं सब यही सुझाते हैं की तुम वह काम करो जिसमें तुझे रुचि हो, करने में मज़ा आए और प्रसन्नता मिले ।

जिनमें विद्या अर्जन, बुद्धि विकास, और ज्ञान मार्ग में अधिक रुचि है वो ब्राह्मणत्व वाला कार्य करें। जिनमें शारीरिक क्षमता और शक्ति के पथ पर चलने की इच्छा हो वो राष्ट्र और रक्षा सम्बन्धी कार्य को करें। जिन्हें धन अर्जन का शौक़ हो वो वैश्य (उद्दमी) का कार्य करें और जिन्हें सेवा सहायता के क्षेत्र में कौशल हो तो वो शूद्र (सेवा) का कार्य करें।
सफलता का मूल मंत्र ही यही है की यदि एक व्यक्ति एक प्रकार का कार्य पूरा मन लगाकर करता है, तो उसमें कुशलता और विशेषज्ञता मिल जाती है ।। बार- बार कार्य को बदलते रहने से कुछ भी लाभ नहीं होता, न काम ही अच्छा बनता है।

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Be a man of peace

Be a man of peace observing nothing else but a pool of silence.

Every moment pulsate a new kind of energy into the world, sing a new song, and live in a totally new way.

Your very way of life is that of grace, that of prayer, that of compassion.

Whosoever you touch, you create more love-energy. Whichever place you visit, you spread love-scent.

Be the man of creation of peace. Not against anything, because to be against anything is to be at war. You are not here to live like every moment in a war-like situation, you simply understand why you exist, and out of that understanding you become peaceful.

Only when there are many people who are pools of peace, silence, understanding, the world will be a more beautiful voyage, more flowers will bloom.

Om peace…

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समदर्शी ज्ञानी पुरुष ब्राह्मण में चाण्डाल में तथा गाय हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखते हैं

श्रीकृष्ण कहते हैं “समदर्शी ज्ञानी महापुरुष विद्याविनययुक्त ब्राह्मण में और चाण्डाल में तथा गाय हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्माको देखनेवाले होते हैं।”

हमारी सामाजिक प्रथा मानव को जाती के आधार पर बाँटती है तो पशुओं को योनि के आधार पर। यहाँ श्रीकृष्ण कहते हैं की जो आध्यात्मिकता के बल से समदर्शी हो गए हैं वो जाती वर्ग, धर्म चरित्र स्वभाव व्यवसाय रोज़गार इत्यादि द्वारा मानव और जानवर में भेद नहीं करते। जैसे सूरज की रोशनी सब के लिए बराबर है। जैसे वर्षा सब जगह बराबर होती है। जैसे हवा समान रूप और गति से सब जगह उपलब्ध है

मुझे एक कहानी याद आ रहा है। इंद्र अपनी सभा में राजा श्रेणिक के समदर्शिता की प्रसंशा कर रहे थे। एक देवता से सुना न गया। उन्होंने श्रेणिक की परीक्षा लेने के लिए धरती लोक पर आए।वो साधु का रूप बनाकर तालाब में मछली मारने का नाटक करने लगे। थोड़ी देर में श्रेणिक जब उधर से गुजरे तो उन्होंने आपत्ति जतायी “अरे! आप यह क्या अपकर्म कर रहे हैं?

साधु ने जवाब दिया “मैं धर्म अधर्म नहीं जानता। मैं इन मछलियों को बेचूँगा और जाड़े के लिए कम्बल खरीदूँगा।”

राजा श्रेणिक बिना कोई जवाब दिए वहाँ से चल दिए।

देवता वापस आकर इंद्र से बोले “श्रेणिक सचमुच में साधु है — उसने पापी असदाचार की निंदा एवं उनसे घृणा करना भी छोड़ दिया है।”

वही लोहा पूजा में भी और बधिक के काम भी आता है।
नाले का पानी जब गंगाजल में मिल जाता है तो गंगाजल बन जाता है।

एक ही पत्थर भगवान की मूर्ति और नारियल तोड़ने के लिए उपयोग किया जाता है।

समदर्शी बनिए भेद भाव छोड़िए।

आत्मा तथा परमात्मा के लक्षण समान हैं दोनों चेतन, शाश्र्वत तथा आनन्दमय हैं | अन्तर इतना ही है कि आत्मा शरीर की सीमा के भीतर सचेतन रहता है जबकि परमात्मा सभी शरीरों में सचेतन है | परमात्मा बिना किसी भेदभाव के सभी शरीरों में विद्यमान है।

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तुम मेरे शोक ऑब्जर्वर हो

गाड़ी सड़क पर चलती रहती है। एक्सेलेरेटर, गियर, ब्रेक, इंजन सब आपस में तालमेल बनाए हमें गंतव्य तक पहुंचने में मदद करते रहते हैं।

लेकिन, इस सब के बीच में एक गाड़ी का पार्ट होता है जो बिना कुछ बताएं या जताए गाड़ी को ऊंच नीच गड्ढा खाई से बचाते हुए एक सुखद और आरामदायक सफर मुमकिन करता है उसे शोक ऑब्जर्वर कहते हैं।

हमारी जिंदगी में भी कुछ लोग ऐसे ही शॉक ऑब्जर्वर की तरह होते हैं। न कुछ मांगा, न कुछ पूछा, न जताया न बताया, बस आपके जीवन मार्ग को सुखद और आरामदायक बनाता रहा —अच्छे वक्त मै साये की तरह और कठिन क्षणों में शॉक आब्जर्वर की तरह!

ऐसे लोगों का नाम पता अपने दिल पर लिख लीजिए।

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जो यह पढ़े हनुमान चालीसा होये सिद्धी साखी गौरिसा

सिद्धि का अर्थ अलौकिक शक्तियों के प्रभाव से कठिन से कठिन कार्य में भी जैसे कि किसी लक्ष्य की प्राप्ति, किसी समस्या का समाधान, या किसी परियोजना में सफलता प्राप्त कर लेना है।

मन की शुभ कामनाओं की पूर्ति हो जाना मनोकामना सिद्धी है।
भक्ति की याचना करते करते भक्त हो जाना भक्त की सिद्धी है।
परमात्मा की प्रार्थना करते करते परमात्मा मिल जाए तो भक्ति की सिद्धी है ।
और आत्मनुभूति हो जाए तो ज्ञान की सिद्धी है।
जगत में राग न रहे तो वैराग्य की सिद्धी है ।

उपरोक्त अंश हनुमान चालीसा की फलसिद्धि के लिए सम्मिलित है और तुलसीदास कहते हैं की जो व्यक्ति यह हनुमान चालीसा पढ़ लेता है उसको सारी सिद्धियाँ प्राप्त हो जाती है और यह भगवान शंकर को साक्षी रखकर प्रमाणित है।

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तत्त्वज्ञान से ही परमात्मा दर्शन

श्री कृष्ण कहते हैं ^हे पार्थ जब तुम तत्वज्ञान को प्राप्त कर लोगे तो तुममें जो यह मोह माया है वह नहीं रहेगी और तुम सम्पूर्ण प्राणियों को अपने आत्म स्वरूप में तथा मुझमें देखोगे।”
पहले श्रीकृष्ण कहते हैं कि गुरुसे विधिपूर्वक श्रवण मनन और निदिध्यासन के द्वारा तत्त्वज्ञान प्राप्त करनेपर तुम सबसे पहले अपने स्वरूपमें सम्पूर्ण प्राणियोंको देखने लगते हो। सब मैं ही हूँ और सबमें मेरे ही अंश है। फिर जब हम सत्संग, ध्यान, धारणा इत्यादि प्रक्रियाओं द्वारा ईश्वरीय तत्व को समझ लेते हैं फिर तुम्हारी यात्रा तत्वमय स्वयम से ईश्वरमय में विलीन हो जाती है। फिर तेरा मेरा का फेर छूट जाता है। तुम्हारा क्या है जो तुझे खोने का डर है। तुमने क्या पैदा किया है जिसके नष्ट होने से तुम दुखी होओगे। न कोई उमंग है। न कोई तरंग है।  द्वैत अद्वैत से भी परे अहं ब्रह्मास्मि में स्थित हो जाओ इसे श्रीकृष्ण तत्वज्ञान कहते हैं।

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ज्ञान प्राप्ति के योग्य गुरु कौन है

श्रीकृष्ण कहते हैं “अपने आप को सम्पूर्ण समर्पित कर नम्रता, सरलता और जिज्ञासु भाव से ऐसे गुरु जिन्हें आध्यात्मिक शास्त्रों का पूर्ण ज्ञान हो तथा जो अनंत स्वरूप परमार्थ सत्य के अनुभव में दृढ़ स्थित हो उनके पास जाकर ज्ञान प्राप्ति कर।”

गुरु वह है जो अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान रूपी प्रकाश की ओर ले जाए। क्योंकि हम ज़िंदगी में कई बार ऐसे दुर्गम स्थिति से गुजरते हैं जहां हमारे लिए सही सोचना, सही समझना और समुचित निर्णय लेना दूभर हो जाता है। अर्जुन भी काफ़ी परेशान था और पशोपेश में था।
दो जगह हमें गुरु की आवश्यकता का बहुत ही सुंदर परिचय मिलता है — (क) जब राम सबरी के आश्रम में आते हैं तो सबरी उन्हें पहचान नहीं पाती और कोई छलिया समझकर भाग देती हैं तो उसी समय उनके गुरु मतंग मुनि जी प्रकट होते हैं और कहते हैं “ऐ सबरी यही तो तुम्हारा राम है।” (ख) जब तुलसीदास जी के पास राम लक्ष्मण बाल रूप में आते हैं और चंदन लगा देने कीं ज़िद्द करते हैं तो वो उन्हें भगाते हैं तभी हनुमान जी आकर उन्हें कहते हैं “ये भगवान राम और लखन स्वयं ही बालरूप में हैं” आपने सुना ही होगा “चित्रकूट के घाट पर लगे संतान की भीर। तुलसीदास चंदन रगड़े तिलक करे राम रघुवीर।”
ज़िंदगी में जब भी प्रश्न या परेशानी हो तो सब से पहले “गुरु से निदान का आग्रह कीजिए, अगर गुरु ना हों तो शास्त्र में सुझाए गए उपाय का अनूशरण कर लीजिए और वह भी उपलब्ध न हो तो अपने हृदय की आवाज़ सुनकर निर्णय ले लीजिए लेकिन कभी भी किसी अनभिज्ञ मानव के सलाह से निर्णय मत लीजिए।”

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Dreaming with the eyes wide open

For most of the entrepreneurs and founders, there is a thin line between the weekdays and weekends. I work for managing the business during the days and weekends mostly spent on ideation, visualization, roadmap development, meetings with entrepreneurs and mentoring people.

I also spend a considerable amount of time during the weekends in daydreaming with the eyes wide open. When I am fully awake and that inner voice of faith begins speaking the promises of good things and social impacts that I have made to myself. I dream to soar my imaginations to boost the performance and connect the missing links to accomplish the goals.

Based on my experiences, I dare you to dream during the day. Want to experience it now. Close your eyes and start breathing; inhale for 5 seconds, hold for 20 seconds and exhale within 10 seconds. Continue for 10-20 minutes. Permit the voice of your spirit to embrace and let you tell about the big and bold good things that have yet to come into your life to make your living a bright and beautiful one.

Daydreaming is the seed of goodness that you saw in your life field to crop a good life. When you have an idea clarity coming from within you can then apply other factors to make it a reality.

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जो भक्त जिस प्रकार मेरी शरण लेते हैं मैं उन्हें उसी प्रकार आश्रय देता हूँ

श्रीकृष्ण कहते हैं: “हे पार्थ जो भक्त जिस प्रकार मेरी शरण लेते हैं मैं उन्हें उसी प्रकार आश्रय देता हूँ क्योंकि सभी मनुष्य सब प्रकारसे मेरे मार्गका अनुकरण करते हैं।”

ये यथा मां प्रपद्यन्ते तांस्तथैव भजाम्यहम् |
मम वर्त्मानुवर्तन्ते मनुष्या: पार्थ सर्वश: || 11||

देवकी और वसुदेव जो पूर्वजन्म में प्रिश्रि और सुतपा थे उन्होंने “मुझे आप जैसा संतान मिले” यह माँग लिया। उन्होंने भगवान से कुछ मांगने के जगह भगवान को ही माँग लिया।

राधा ने उन्हें अपनी प्रेमी के रूप में मन और हृदय में बसा लिया।

द्रौपदी के लिए सखा अर्जुन के लिए पथप्रदर्शक

सूरदास जी ने कृष्ण के बालरूप को ही अपना लिया उन्हें बड़ा होने ही नहीं होने दिया।

मीरा ने अपना सर्वश्व मानकर सबकुछ समर्पण कर दिया।

कई के लिए भगवान तो कहीं नारायण।

कुछ भुक्ति के लिए शरण का आश्रय ले लिया कुछ ने मुक्ति के लिए चरण में न्योछावर हो लिए।

कुछ दुर्योधन जैसे भी हुए जिन्होंने नारायणी सेना की तरह धन, संपती, सुख, वैभव, इत्यादि जैसी वस्तुएँ माँग ली और और मोती छोड़ कौड़ी से खुश हो गए।
पढ़िए। सोचिए। स्मरण कीजिए। आपको शरणागत के शरण में कैसी शरणागति चाहिए।

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Tear off the Curtain

Gauri Sarin quoted Sadguru, “Life must not be a Pursuit of Happiness but an Expression of Joy.” This got me into thinking – when we all know that joy is so much wonderful and we know that it’s possible then why do we put a delusory curtain to victimize the self in misery?

It’s said that happiness and misery are divided by a curtain of illusion. It’s like you know that the ray of morning sun is blissful yet you put the curtain to get the darkness in your bedroom to continue sleeping. The illusory curtain is very attractive and pleasant. The sleeping person is consummated under the influence that nothing is going to change by him loosing his sleep as things are going to happen in its own time.

On the other side when you experience the sun rising, the first ray of sun on your face, the fresh morning air, the bird chirping or you can get your work done without distractions – you will find that you have been missing so much. You have lost so much of bliss experiences and you have lost valuable time that would have helped shape your life so much better.

To experience joy you need to tear off the illusory curtain that is blocking the joy to appear in your life. Tear off the curtain so that you can experience the sunshine, tear off the curtain so that you can feel the bliss. Sit quietly and experience the peace and you’d never want to go back to the darkness again. Once you tear off the curtain and experience the joy you’d never return back. Om Joy!

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ईश्वरीय भाव कैसे प्राप्त करें

श्रीकृष्ण कहते हैं:
“राग भय और क्रोधसे सर्वथा रहित मेरे में ही तल्लीन मेरे ही आश्रित तथा ज्ञानरूप तपसे पवित्र हुए बहुतसे भक्त मेरे भाव को प्राप्त हो चुके हैं।”

यहाँ श्रीकृष्ण ने कृष्णमय होने का उपाय बताया है। सर्वप्रथम तो इस बात की गारंटी दे रहे हैं कि मेरे में तल्लीन होकर, मेरे पर आश्रित होकर और ज्ञान से परिपूर्ण ताप द्वारा पवित्र होकर लोग मेरे स्वरूप को प्राप्त कर चुके हैं। लेकिन  शर्त भी यह हैं कि मुझमें भाव प्राप्ति से पहले  राग, भय और क्रोध को छोड़ना ही होगा। राग छोड़ने के लिए निष्काम कर्म, भय दूर करने के लिए अपने कर्म को ईश्वरीय आज्ञा मानकर पूरा करना और क्रोध से मुक्ति के लिए सर्वत्र ईश्वरीय अनुभूति को विकसित करना ही एकमात्र उपाय है।

एक बार मुझे क्या कमी है ऐसा मन बनाकर जी कर देखिए। एक बार मुझे किसी चीज़ से कोई दरकार नहीं है ऐसा विचार करके देखिए। एकबार ग़ुलाम की तरह नहीं बल्कि गुल्फ़ाम की तरह मन बनाकर जिएँ।

यही मार्ग तुलसीदास जी ने भी तो रामायण में कहा ही है: “प्रेम भगति जल बिनु रघुराई। अभिअंतर मल कबहुँ न जाई।”

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How to avoid the costly mistakes and get out of it

Today we are living in a world in which keeping our relevance is kind of a way too chaotic. The ‘surplus society’ has a surplus of similar
people, with similar educational backgrounds, coming up with similar ideas, producing similar things, with similar prices and similar quality. It looks an ideal terrain of no choices, but to keep juggling between a dozen of challenges seeking our attention and draining our energies.

The way to survive and thrive is to act like classical heroes, who are called upon to undertake a quest, and must journey into the unknown along uncertain paths, facing obstacles and difficulties. But thanks to their powerful initial calling, they persist and become heroes when they reach their goal. You need to act with your heroic trait and get through these passing obstacles to turn them into the opportunity.

1) Discover your true calling, acquire the skills and hone your talent so that you can accomplish your vision
2) Ensure that you keep following the path and no draggers and braggers steal you away from your core values
3) Upgrade your capabilities to stay relevant with the market reality. Nothing other than heavenly pleasure is attained while living in the silos
4) Mistakes and failures happen. Learn from it, respond rapidly and take the first step towards the road to recovery.

In this storm, it would be useful to have a compass that clearly indicates priorities, and discover the approaches that will work for you. This way you will avoid the mistakes others have made, that have led them to distress.

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